आखिर वाराणसी का कसूरवार कौन?

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  • अभय मणि त्रिपाठी

वाराणसी में मंगलवार की शाम कैंट निर्माणधीन पुल के अचानक ढ़ह जाने से 16 (वृद्धि हो सकती है) लोगों के मौत का जिम्मेदार कौन है ? प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना का होना बड़ा ही चिंताजनक विषय है , जब प्रधानमंत्री के ही क्षेत्र में इतनी बड़ी लापरवाही हो सकती है तो बाकी जगहों पर कुछ भी हो सकता है, प्रधानमंत्री क्या किसी भी जगह ऐसी लापरवाहियों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है । आखिर इतनी बड़ी लापरवाही का कसूरवार किसको माना जा सकता है, उस ठेकेदार को जो उसको बना रहा है या उस इंजीनियर को जिसको इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है या उसको जिन्होंने इन इंजीनियरों को बनाया है अर्थात उन प्राइवट संस्थानों को जिन्होंने इनसे भारी भरकम फीस लेकर आधा अधूरा ज्ञान देकर , इनको ही आधा तैयारकर इस प्रोफेशन में धकेल दिया है और हर वर्ष धकेला जा रहा है आखिर कौन है इनका जिम्मेदार ? सारी लापरवाहीयों का खामियाजा तो जनता को ही ही भुगतना पड़ता है , शायद कुछ लोगों की नज़र में उनकी ही गलती रही होगी कि वो वहां से क्यो गुजर रहे हैं जरुर क्या थी ? ऐसे लोगों की मानसिकता को समझा जा सकता है बस । खैर, जनता को अगर कुछ हुआ तो देने के लिए मुआवजा तो है ही भोली जनता इसको पाकर शांत हो जायेगी विरोध रुक जाएगा और फिर सारी लापरवाहियों को अनदेखा कर दिया जाएगा और एक बार फिर कुछ बड़ी अनहोनी होने का इंतजार किया जायेगा।

वैसे ये कोई नई बात नहीं है हम लोग ऐसी दुर्घटनाओं के आदि हो चुके हैं हर बार ऐसी कुछ न कुछ दुर्घटनाओं से लगातार मुखातिब होना हमारी आदत सी हो गयी है और ऊपर से हमारी प्रतिक्रिया क्या होती है बस इस पर हमको सोशल मीडिया पर कुछ डालने के लिए उस पर बहस करने के लिए एक टाॅपिक मिल जाता है , हां और क्या ! आपके सोशल मीडिया पर बड़ी – बड़ी बातों का कोई असर हुआ ? सरकार जागरुक हुयी या जनता ? चाहे रेलवे दुर्घटनाओं पर आप बात किए हों जो आज भी आय दिन होती है और ख्वाब है बुलेट ट्रेन का , या किसी और घटना पर। हो सकता है आपको इन दुर्घटनाओं से पीड़ित होने पर कुछ मुआवजा मिला हो बेशक आपको इससे कुछ राहत भी मिली होगी , पर क्या आपने मुआवजे को लेते समय ये सोचा कि क्या आपको मुआवजा देते समय ये वादा किया गया है कि अगली बार आपको या आपके परिवार के या किसी सदस्य को आपसे नहीं बिछड़ना पड़ेगा उनके साथ ऐसी दुर्घटना कभी नहीं होगी उनको इस बेदर्दी को झेलना नहीं पड़ेगा, कब तक आप अपनो के बिछड़ने पर मुआवजे लेकर शांत होगे ये मुआवजे देकर आपका मुंह बंद करवा देते हैं।

मैं मुआवजे का विरोधी नहीं हूं , मुआवजा बिल्कुल मिलना चाहिए लेकिन क्या मुआवजे से किसी कि जिंदगी की तुलना कर सकते हैं , नहीं । हमें मुआवजे के साथ सरकार से ये वादा भी लेना चाहिए कि अगली बार ऐसी लापरवाहियां नहीं होंगी जिनसे जनता को कोई नुक़सान हो।।

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I'm so keen person to learn from anyone. I write poems, short stories, articles and so other write-ups. I won many essay competitions. I've awarded many times by Pratiyogita Darpan for Hindi & English essay competitions. I won Jagran Young Editor competition and has been a MP in DJYP. I do anywork without thinking about result because i believe as a human only work is our hand recess god know that's why i try to give my 100% in any work. For contact me : [email protected] in facebook ; Jitendra pandey
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