हिंदी पत्रकारिता दिवस

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हिंदी पत्रकारिता दिवस
  • अंकित तिवारी

पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा जाता है। यदि हम हिंदी पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहे तो यह कुछ गलत नहीं होगा क्योंकि भारत में बहुत से लोग हिंदी भाषी लोग है। हिंदी पत्रकारिता की भारत में शुरुआत 30 मई 1826 को पंडित युगल किशोर ने कलकता में प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का आरम्भ हुआ तब से हिंदी पत्रकरिता मनाया जाता है।

हिंदी पत्रकार देश को चलने के लिए महत्वपूर्ण अंग है क्योकि भारत में हिंदी भाषा झुंगि झोपड़ी , सब्जी बेचने वाले या फिर आम इंसान की भाषा होती है । हिंदी पत्रकारिता के माधय्म से हम तक जानकारी आती है क्या हो रहा है समाज , सरकार इत्यादि की जानकारी हमें हिंदी पत्रकार के माधय्म से पता चलता है ।

लेकिन कुछ दिनों में हिंदी सवर्णों की भाषा हिंदी नहीं रह गई है ।ये वो लोग है जो सत्ता चला रहे है कॉरपोरेट चला रहे है। ये हिंदी भाषा को निम्न भाषा के दर्जे में ला रहे है। आज लोग बड़े गर्व से कहते है हमें हिंदी नहीं आती है, वो हिंदी भाषी लोगो को गवार8 समझते है इसलिए वो खुद को बड़ा दिखने के लिये खुद इंग्लिश न्यूज़ पेपर पढ़ते है ।

उनका मत है की हिंदी में जो न्यूज़ पेपर है उसका कोई महत्त्व नहीं है केवल इंग्लिश में ही अछि खबर आती है। जबकि हिंदी न्यूज़ पेपर पढने वालो की संख्या बहुत जादा है जो आज भी हिंदी पत्रकारिता को एक ससक्त स्तम्भ की तरह मजबूती से खड़ा किये है। आज भी हिंदी पत्रकारिता देश की दशा और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है ।

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