स्वच्छ भारत

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  • उत्कर्ष वर्मा

जब स्वच्छ होती थी मेरे भारत की सीढ़ियां इसीलिए तो कहलाता था यह सोने की चिड़िया फिर शुरू हुई गंदगी की दास्तां
हर जगह नजर आते बस गंदे नाले और सड़कें रास्ता
खुद को चमकाने के चक्कर में देश को चमकाना भूल ही गए
यह चारों तरफ की गंदगी का हम सब ही तो मूल हुए
यह सब देख देश का एक लाल हुआ व्यथित स्वच्छता के लिए दिए गए उसके कथन निम्न कथित

उठाना पड़े झाड़ू चाहे उठाना पड़े पोछा
चलो करें कुछ जिसे अभी तक किसी ने ना सोचा अब रखेंगे स्वच्छता का ध्यान
चलो चलाएं स्वच्छ भारत अभियान
यह शुरुआत हुई 2 अक्टूबर सन 2014
अब करेंगे साफ यह देश जिसे गंदगी न था अब तक रौंदा
हर तरफ छा गई स्वच्छता की लहर
तबसे स्वछ होने लगा सभी गांव कस्बे व शहर चलो अब दो देश की स्वच्छता पर जोर
एक कदम सिर्फ एक कदम स्वच्छता की ओर

 

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