स्त्री : आदर – सम्मान

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तुलसीदास जी ने स्त्री के आदर-सम्मान का वर्णन कुछ इस तरह किया है… “जननी सम जानहिं पर नारी, तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे !” अर्थात जो पुरुष अपनी पत्नी के अलावा पराई स्त्री को माँ समान समझता है, उसी के ह्रदय में भगवान का वास होता है !

लेकिन उन्नाव, कठुआ, सूरत, सीतापुर और लग-भग रोज हो रही ऐसी ही अन्य जगहों पर “बलात्कार” की घटनाओं को देखकर तो लगता है कि इस देश में नारी का सतीत्व और अस्तित्व दोनों खतरे में है ! संसद और विधान-सभा में बैठे तथाकथित माननीय भी इससे अछूते नहीं हैं !

सत्तारूढ़ दल के लोग कहते हैं, कि सरकार को बदनाम करने के लिये ऐसी घटनायें बढ़ रही हैं, पिछली सरकार में क्या ये घटनायें नहीं हो रही थीं ??? विपक्षियों पर आरोप लगता है कि बंगाल, असम, केरल जैसे राज्यों में हो रही घटनायें किसी को नहीं दिखाई देतीं हैं ??? कहीं ऐसी ह्रदयविदारक घटनाओं को भी धार्मिक रंग देने की कोशिश होती है…! अरे भैया… ये आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर ये बेहयाई और बेशर्मी का वाद-विवाद बन्द करिये और इस पर आरोप साबित होने पर मृत्यु-दण्ड या उसके समकक्ष कठोर दण्ड का प्रावधान कीजिये…!

यूँ महिला सशक्तीकरण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे खोखले नारों से लोगों को बेवकूफ मत बनाइये…! SC/ST ऐक्ट को मजबूत करने के लिये जैसे अध्यादेश लाने की बात हो रही है… बेहतर होगा कि वैसे ही इस पर भी कोई कठोर अध्यादेश लाइये…! लोगों में इस घृणित कुकृत्य के लिये डर पैदा करिये…! और हाँ… जाँच ऐजेन्सियाँ इस पर पूरी निष्पक्षता से जाँच करें, इसका पूरा ध्यान एवम् पारदर्शिता रखें… इस पर होने वाली जाँच के मुख्य बिन्दुओं को सार्वजनिक करें… कहीं जाँच के नाम पर ऐसा न हो कि, “झूठे का बोलबाला और सच्चे का मुँह काला !” या ये न चरितार्थ हो कि, “समरथ को नहिं दोष गोसाईं !” और तभी आपके मुँह से “महिला सशक्तिकरण एवम् सम्मान” की बातें भी अच्छी लगेंगी…!

 

  • अर्पित चंसोरिया 

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