शिक्षा की ज़रूरत

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अगर हम देश के संविधान की बात करें तो हमारे देश का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है और देशवासियों के इसपे बहुत गर्व है। अगर हम शिक्षा की बात करें तो इसका महत्व देश में बहुत होना चाहिए परन्तु कुछ वजह से इसका महत्व आज़ादी के 52 वर्षो के बाद भी नहीं पाया है। हमारे देशवासी इसके प्रति जागरूक नहीं हो सके और सरकार की तरफ से पूरी कोशिश की गयी थी कि शिक्षा देश के हर नागरिक को मिले। बच्चे में भी पढ़ने की रुचि आये परन्तु ये सपना तो सपने जैसा ही दिखाई देता है। लोगों के अंदर अभी भी शिक्षा की जागरूकता कम है।

शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देने के लिए आज भी जद्दोजहद जारी है और इसको संक्षेप में संविधान की धारा 45 में सब कुछ बताया गया है। अगर महत्व की बात करें तो बच्चे के लिए शिक्षा के प्रति सरकार ने रुचि जगाने का प्रयास किया है ।आजकल कई विज्ञापन ऐसे आते हैं, जिसमें बच्चों को पढ़ने के प्रति ज़ोर दिया जाता है। संविधान के अनुसार भी 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया गया है।

सरकार का यह कदम बहुत ही सराहनीय है और इससे बच्चों के मन में शिक्षा के लिए जिज्ञासा भी जगेगी । बच्चों का भविष्य बनाने में शिक्षा का भी एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। अगर ये न हो तो हमारी सोचने और समझने की क्षमता भी कुछ हद तक सीमित हो जाती है। आज के दौर में शिक्षा का मतलब सिर्फ पढ़ना- लिखना ही नहीं बल्कि आपका व्यवहार, सोचने समझने की क्षमता और ज्ञान प्राप्त करना भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

ज्ञान तो एक ऐसी ताकत है, जो कभी कोई हमसे चुरा नहीं सकता और ज्ञानी लोगों को पूरे संसार में सम्मान मिलता है।

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