शिक्षा और रोज़गार

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सामान्य रूप से माना जाता रहा है कि शिक्षा और रोज़गार में कोई सम्बन्ध नहीं है । आज के युग में रोज़गार की गारंटी देने का कोई उद्देश्य शिक्षा का कभी नहीं रहा है और ना ही रहेगा अगर शिक्षा में विकास की बात करें तो व्यक्ति सिर्फ अपनी शिक्षा के बलबूते रोज़गार पाता रहा है भले ही किसी भी क्षेत्र की बात करें, सब ही क्षेत्र में व्यक्ति अपनी योग्यता के कारण इसमें उज्जवल होता रहा है । देश में अगर सबसे आवश्यक है तो वो है शिक्षा जो इंसान की सोच और योग्यता के  दम पर उसे सब कुछ करवा सकती है ।

सीधी बात है कि शिक्षा हासिल करना तो आसान है परन्तु रोज़गार की बात करें तो वो एक बड़ी समस्या बन के उभरी हैकई वर्षो से जिसका प्रभाव हमारे देश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है और देश के विकास में इस समस्या से परेशानी हो रही है । लोग ग्रेजुएट हो गए परन्तु अपने पसंदीदा क्षेत्र में नौकरी पाने में असमर्थ साबित हुए हैं ।

स्कूल कॉलेजों में कुछ विषय रोजगारोन्मुख पढ़ाए जाते हें। कॉमर्स, साइंस आदि विषय ऐसे ही हैं, इनके बल पर रोजगार के कुछ अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। साइंस के विद्यार्थी इंजीनियरिंग और मेडिकल आदि के क्षेत्रों में अपनी शिक्षा को नया रूप देकर रोजगार के पर्याप्त अवसर पा जाते हैं ।

सबसे बड़ी हमारे देश में समस्या की बात करें तो जिनको साक्षरता के नाम प्रमाण पत्र दिए जाते हैं, निश्चय ही उनको सबसे ज़्यादा समस्या का सामना करना पड़ता है । भारत में क्या उनको तो विदेश में भी रोज़गार मिलना बहुत मुश्किल है ।

अब जब शिक्षा का उद्देश्य रोजगार पाना बन ही गया है तो पुराने ढर्रे पर चलते जाकर लोगों का धन, समय और शक्ति नष्ट करने, उन्हें मात्र साक्षर बनाकर छोड़ देने का कोई अर्थ नहीं है। ऐसा करना अन्याय है। यह राष्ट्रीय हित में भी नहीं है । इसको रोकने या दूर करने के लिए यदि हमें वर्तमान शिक्षाजगत का पूरा ढांचा भी क्यों बदलना पड़े, बदल डालने से रुकना या घबराना नहीं चाहिए ।

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