विवादित लेकिन पॉपुलर संत जो इस साल चल बसे

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संत

समाज में हर तरह का व्यक्तित्व निवास करता है बच्चों से लेकर बड़ों तक ,अमीर से लेकर गरीब तक और एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व साधु-संतों का जिनकी छवि समाज के भटके लोगों को राह दिखाने की है किंतु किसी सदी में ऐसा उदाहरण देखना मुश्किल है . बीते कुछ महीनों में ऐसे विख्यात बाबाओं के नाम सामने आए हैं जिन्होंने अपने अविश्वसनीय कारनामों से पूरे देश को अचंभित कर दिया है …जिसकी कल्पना करना एक संत समाज ही नहीं अपितु आम समाज के लिए भी शर्म की बात है .. बाबा राम रहीम, आसाराम बापू , राधे मां यह प्रसिद्ध नाम अपने उद्देश्यों और शुभ कर्मों से ज्यादा कुकृत्यों की वजह से सुर्खियों में थे …
इस समाज में शायद अभी भी कुछ त्यागी और तपस्वियों की जगह विद्यमान है प्रसिद्ध संत जो इस वर्ष पंचतत्व में विलीन हुए .

तरुण सागर

कड़वी वैष्णव के लिए प्रख्यात जैन मुनि तरुण सागर (51) का शनिवार 1 सितंबर 2018 को तड़के करीब 3:15 पर शाहदरा के राधे पुरी जैन मंदिर में निधन हो गया  वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे …जैन समाज ने कहा मुनि ने संथारा लिया है .उनके पार्थिव शरीर को दिल्ली-मेरठ हाईवे पर स्थित तरुण सागर राम तीर्थ ले जाया गया . जहां शाम 5:45 पर अंतिम संस्कार किया जाएगा.

इन्होंने 13 साल की उम्र में घर छोड़ दिया तथा 20 साल की उम्र में वे मुनि सागर बन गए .उनका वास्तविक नाम पवन कुमार जैन था ..इनका जन्म मध्यप्रदेश के दमोह जिले में हुआ था … इनके शिक्षा-दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई थी उन्होंने कक्षा-6 तक ही पढ़ाई की थी .मुनि बनने के बाद ही खुद को दिगंबर मानते थे अतः यह तन पर एक भी वस्त्र नहीं धारण करते थे, नहीं स्नान की क्रिया करते थे, पूरे दिन में एक बार भोजन ग्रहण करते थे ,बीमार होने पर दवा ना लेना, कभी ब्रश ना करना ,हमेशा पैदल चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचना आदि उनकी विशेषताएं थी .यह अपने कड़वे वचन के कारण जाने जाते थे इनके द्वारा बोले गए कुछ बोल.

“पत्नी पत्नी जो पति से रहे तनी तनी और खत्म कर दे उसकी मोनी”…
“कुछ कुछ पाना है तो कुछ कुछ छोड़ो .
बहुत कुछ पाना है तो बहुत कुछ छोड़ो.
और यदि सब कुछ पाना है तो सब कुछ छोड़ दो “…
“हर महिला का यह धार्मिक कर्तव्य है कि वह अपने पति के अनुशासन को स्वीकार करें “…
“जिनकी बेटी ना हो उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार ना मिले …जिनके घर में बेटी ना हो वहां शादी ही नहीं करनी चाहिए “…

भय्यूजी महाराज

रजवाड़े के राजकुमार जैसे जीवन शैली जीने वाले भय्यूजी महाराज ने मंगलवार 12 जून 2018 को खुदकुशी कर ली इंदौर के मुंबई अस्पताल में उनका निधन हो गया …खुदकुशी का खुलासा उनके द्वारा लिखे सुसाइड नोट से हुआ..इंदौर के आध्यात्मिक नेता और BJP संघ के करीबी थे भय्यूजी महाराज …भय्यूजी का वास्तविक नाम उदयसिंह देशमुख था….यह रसूख संत के नाम से विख्यात थे ..मध्य प्रदेश और गुजरात की सियासत में इनका गहरा प्रभाव था.. अन्ना जी के आमरण अनशन को खत्म करवाने के लिए इन्हें ही मुख्य रूप से बुलाया गया था …भय्यूजी महाराज का सतगुरु नाम से ट्रस्ट है जो किसानों की खेती कैदियों के बच्चों की शिक्षा तथा और भी जरूरतमंदों की जरूरत पूरा करने में सहायता करता है…यह मुख्य रूप से सूर्य के उपासक थे ..

मौनी बाबा

संत और अपनी तंत्र मंत्र विद्या के लिए प्रख्यात मानी बाबा के निधन के बाद हर कोई इस संत के बारे में जानना चाहता है .करीब 108 वर्ष की आयु में अपना देह त्यागने वाले माने बाबा ने बीते 80 वर्ष से चुप्पी साध रखी थी .उज्जैन के गंगा घाट पर स्थित आश्रम मैं बाबा बीते कई सालों से ध्यान कर रहे थे ..बाबा ज्यादातर अकेले रहना ही पसंद करते थे …जीवन के अंतिम वर्षों में हाल ही में उन्होंने अपने भक्तों को दर्शन देना आरंभ किया था ,अन्यथा मोनी बाबा साल में सिर्फ दो बार ही दर्शन देते थे ..एक गुरु पूर्णिमा के दिन और दूसरा दिन था उनका खुद का जन्मदिन 14 दिसंबर को .. मोनी बाबा के जन्म वर्ष के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है लेकिन उनकी आयु करीब 108 वर्ष मानी जाती है..बाबा उज्जैन में कहां से आए,इसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है उनके मूल स्थान के बारे में उन्होंने कभी खुलासा नहीं किया ..पहली बार लोगों ने उन्हें उज्जैन के नरसिंह घाट और गंगा घाट पर ध्यान साधना करते हुए देखा था.बाबा मौन रहने को ही सबसे बड़ी शक्ति मानते थे .

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