लोकतंत्र में विपक्ष का महत्व

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लोकतंत्र के लिए तथा देश की चुनाव व्यवस्था के लिए पक्ष तथा विपक्ष का होना अत्यंत जरूरी होता है। खासकर किसी भी लोकतंत्र के लिए विपक्ष का होना काफी जरूरी हो जाता है। विपक्ष के बिना लोकतंत्र का रहना संभव ही नहीं है।

भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देशो में से एक है तथा भारत में विपक्ष हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। चाहे वह आज़ादी के बाद से लेकर अब तक के चुनाव हों। विपक्ष ने चुनावो में अपना तथा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण रोल निभाया है।

यदि हमारे देश की राजनीति की बात की जाए तो चुनावों में जाति, धर्म, के साथ-साथ नाम तथा राजनीतिक चेहरा भी काफी महत्वपूर्ण रोल निभाता है। जैसा कांग्रेस नेहरू और गांधी के नाम पर वोट मांग के काफी लम्बे समय तक चुनाव जीतती आ रही थी। इसी के साथ यदि हम २०१४ के चुनावों की बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी ने मोदी के चेहरा के आधार पर ही इतनी अच्छी जीत हासिल कर पाए थे। २०१९ के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। बीजेपी एक बार पूरी तरह तैयार है, चुनावों में अपने आप को उतारने में। हालांकि जहां तक विपक्ष की बात है तो उसने भी एकजुट होने का ऐलान कर दिया है तथा बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाने का ऎलान कर दिया है।

विपक्ष के चेहरे बनने के दावेदार – हालांकि विपक्ष ने एकजुट हो कर चुनाव लड़ने की तैयारी तो कर ली है परन्तु प्रधानमत्री के लिए दावेदार कौन होगा? इसके लिए कुछ पूर्ण रूप से नहीं बताया है। यदि देखा जाए तो विपक्ष में काफी ऐसे चेहरे हैं, जो दावेदारी के लिए चुने जा सकते हैं। जिनमें से राहुल गाँधी जो कांग्रेस का एक काफी महत्वपूर्ण चेहरा है। इसी के साथ समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव को भी देखा जाए तो उनका भी राजनीति में अच्छा खासा अनुभव रहा है तथा वह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वह रह चुके हैं। खैर इसके अलावा भी काफी ऐसे चेहरे हैं, जो आगे आ सकते हैं।

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