राग, रंग और पकवान का संगम है फाल्गुनी (होली)

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होली- रंगों का त्योहार। तरह तरह के रंगों से लोगों की जिंदगी गुलज़ार कर देने वाला त्योहार। त्योहार कोई भी हो बिना पकवानों के ये अधूरा ही रहता है। होली तो लजीज़ पकवानों की खेप ही लेकर आता है। एक से एक व्यंजन लोगों के मन को लुभाते हैं। फाल्गुनी राग और रंग का त्योहार है। फाल्गुन मास में मनाये जाने से होली को फाल्गुनी कहते हैं। अबीर-गुलाल, रंग और गाने-बजाने का अनूठा संगम है होली।

त्योहार कोई भी हो, किसी भी मजहब का हो, लाता है ढेर सारा हर्ष,उल्लास, प्रेम, मौज-मस्ती, सुख, चहल-पहल, मेल-जोल। किसी भी त्योहार का अपना एक इतिहास होता है। होली का भी है, मगर मेरे ख़याल से उससे तो अधिकतर लोग वाकिफ़ होंगे। मेरा मानना है कि किसी भी मजहब को कोई भी त्योहार हो वो तो सिर्फ और सिर्फ खुशियाँ लाते हैं। भारत जैसे देश मे तो ये बात भरपूर लागू होती है। कई सोशल एक्सपेरिमेंट्स के जरिये ये बात सामने आ चुकी है कि लोग एक दूसरे के मजहब, भावनाओं, विचारों की कद्र करते हैं। सबके सुख दुःख में शामिल होना यहाँ एक बड़ी ख़ूबी है। होली-ईद इसका बेहतरीन उदहारण है।

भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का भी वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।

लेकिन इसी त्योहारों की आड़ में फलता है मिलावटखोरों का धन्धा हालांकि मिलावट का ये खेल महज त्योहारों पर ही नहीं खेल जाता। ऐसे गोरखधंधे पिछले कुछ अरसों से बहुत तेजी से पनप रहे हैं मगर किसी ख़ास पर्व पर ये अधिक बढ़ जाता है। थोड़ा सा मुनाफा कमाने की होड़ में ये मिलावटी लोग अन्य जन के रंग में भंग डालने का काम करते हैं। इससे हम सभी का नुकसान ही है।

इन सबसे इतर होली का प्रभाव कुछ लोगों पर अभी भी देखने को मिल रहा है। बरसाने की लठमार होली, जिसमें युवक युवतियों पर रंग डालते हैं और वो युवतियाँ उन पर लाठियाँ और कपड़ों से बने कोड़े बरसाती हैं, आज आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। मथुरा और वृंदावन की 15 दिनों की होली तो देश भर में मशहूर है।

त्योहार, पर्व खुशियों का साथ ही लाते हैं थकान। होली तो हो ली। छुट्टियाँ ख़त्म अब लोग वापस दफ़्तर पर लौट रहे हैं, अपने काम पर लौट रहे हैं लेकिन थकान उनका पीछा नहीं छोड़ रही। बहरहाल, भारत पर्वों का बड़ा धनी है। होली का बाद अब लोग अगले त्योहार की बाट जोह रहे हैं।

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