मोहब्ब़त

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मोहब्ब़त

सच्ची मोहब्ब़त मुक़म्मल अंजाम तक न पहुंचे तो तकलीफ़ होती है,

नयनों से अश्रु बनकर मोहब्ब़त के विरह की वेदना की बाऩगी झलकती है।

दोस्तों, मोहब्ब़त रूहों का पाक मिलन होता है,

तभी तो सच्ची मोहब्ब़त ख़ुदा की अरदास सम होती है।।

ये नाचीज़ रब से दुआ मांगता है,

दुआ में सच्ची मोहब्ब़त के मिलन की फ़रियाद मांगता है।

फ़रियाद सुनना या अनदेखा करना उसकी रज़ा,

‘जीत’ तो बस हर मोहब्ब़त की ख़ुशी मांगता है।।

काय़रों की तरह मरके मोहब्ब़त जताना मोहब्ब़त नहीं है,

मोहब्ब़त के लिए माँ-बाप की मोहब्ब़त न समझना मोहब्ब़त नहीं है।

मोहब्बत में मोहब्ब़त के लिए जीना भी इक मोहब्ब़त है,

क्योंकि सब मिल ही जाए यहां ऐसा मुमकिन नहीं है।।

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