मुसाफिर

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मै चलता मुसाफिर हूँ, तुम छांव दे देना,

प्रेम की छांव तले न सही, पेड़ के नीचे ही बैठने देना,

कोई अगर कुछ पूछे, तो मेरा परिचय दे देना,

अपना प्रेमी न सही, एक मुसाफिर ही बता देना,

शांती से बैठकर दो पल बातें कर लेना,

कुछ तुम अपनी बात बताना, कुछ मेरी सुन लेना,

जब मै नाराज़गी जताऊँ तब तुम मना लेना,

हँसी खुशी ये पल मुझे जी लेने देना,

जब चलने लगूँ तुम मेरा हाथ पकड़ लेना,

अभी और बातें करनी है, ये कहकर तुम मुझे रोक लेना,

अपने प्रेम की छांव तले तुम मुझे जी लेने देना,

मै चलता मुसाफिर हूँ, तुम छांव दे देना ।

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