भारत में भ्रष्टाचार

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भ्रष्टाचार

‘भ्रष्टाचार शब्द दो शब्दों के मेल से बना है –‘भ्रष्ट + आचारअर्थात ऐसा व्यवहार जो भ्रष्ट हो, जो समाज के लिए हानिप्रद हो। भ्रष्टाचार के मूल में मानव की स्वार्थ तथा लोभ वृति हैअगर आप भारत में फैली एक ऐसी बिमारी के बारे में बात करे जो जड़ तक चुकी है बात हो रही है भ्रष्टाचार की  जिसके  कारण देश के हर नागरिक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता ही आज भ्रष्टाचार जीवन के प्रत्येक छेत्र में फ़ैल चूका है .

जिसके कारण देश का जितने भी छेत्र हर जगह भ्रष्टाचार नमक रोग हमारे देश को दीमक के  सम्मान खोकला कर रहा है विधालय से ले कर अस्पताल तक ऐसे महत्वपूर्ण छेत्र भी इसकी चपेट में चुके है .आज के युग में हर इंसान अपनी इच्छाओ की पूर्ती करने के लिए अपनी सैलरी के अलावा और भी पैसे बनाने की लालसा में  लगा रहता है यही  एक ऐसी बड़ी वजह है जिसके कारण हमारे देश को इसका सामना करना  पड़ता है.

जिस देश में हर क्षेत्र में भ्रष्टाचारी विद्दमान हों, उसका क्या अंजाम होगा, सोच पाना भी कठिन है आजकल तो व्यापारी भी मिलावटी  सामान बेच अपना लाभ चाहते है उनको जनता की परवाह नहीं और कोई अनुमान नहीं की इसे हमारे देश का स्वस्थ व्यवस्था कितनी बुरी भी हो सकती है .फलो सब्ज़ी की बात करे तो इनमे भी रासायनिक पदार्थ इस्तेमाल किया जाने लगा है और जनता जागरूक होकर भी खरीद रही करे क्या और कोई साधन भी नहीं है चोरी करना भी आसान हो गया है तस्करी के सामान को खुले आम बेचा जा रहा है जितने भी उच्च अधिकारी है इनकी मौजूदगी में ही भ्रष्टाचार पनपता है .

भ्रष्टाचार मुक्त भारत कैसे बनाया जाए यह एक गंभीर प्रश्न है .ऐसा करने के लिए हम देश वासियो को नियम कानून और संविधान आयी पी सी की धाराओं ला सम्मान करना चाहिए और कानून से खिलवाड़ ना करने की शपथ लेनी चाहिए ताकि हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत बना सके और देश को अव्व्वल दर्जा दे पाए इसमें हर नागरिक को लेना आवश्यक है

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