फर्ज़

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सुबह बिस्तर से उठकर वो भगवान को याद करती है,
बच्चों को तैयार कर वो उन्हे स्कूल भेजती है,
गर्म चाय की प्याली लाकर पति को वो उठाती है,
उनकी ज़रूरतों को पूरा कर वो उन्हे अॉफि्स भेजती है,
सास ससुर उठ गए होंगे वो यही सोचती है,
उनके पैरों को छूकर वो अपना फर्ज़ निभाती है।
गंदे कपड़ों को वो वॉशिंग्मशीन में धो देती है,
सूख जाएँ इसी ख्याल में वो उन्हे छत पर डाल देती है।
फिर खाने की तैयारी में वो जुट जाती है,
प्रेम रस घोलकर वो खाने को स्वादिष्ट बनाती है,
दिन भर की थकान में भी वो काम करती रहती है,
रात को बिस्तर पर लेटकर वो कल की तैयारी करती है,
जीवन की इसी भाग दौड़ में वो जीती है,
दिन भर क्या करती हो बस अंत में वो यही सुनती है।

#महिला_दिवस
#जीवन #महिला #गर्व #ज़िंदगी

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