प्रधानमंत्री शेख हसीना का बयान – मेरी टिपण्णी

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  • रमेश चन्द्र शुक्ल

प्रधानमंत्री शेख हसीना का बयान कि ”एक लाख रोहिंग्यास को बाढ़ ग्रस्त द्वीप पर बसायेगीं” यह पहले से ही भीषण ह्यूमन ट्रैफिकिंग और महामारी झेल रहे निर्वासित समुदाय के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है…!!! भारत में भी करीब 35 हजार रोहिंग्या शरणार्थी शरण लिए हुए हैं , बीते दिनों में जो इंटेलिजेंस रिपोर्ट आई थी उसके अनुसार य शरणार्थी आतंकवादियों के साफ्ट टारगेट पर हैं ऐसे में यह देश की सुरक्षा ब्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती है…!!!

चुंकि भारत ने यूएन शरणार्थी कन्वेंशन को अभी तक रेटिफाइ नहीं किया है और देश में भी शरणार्थियों से सम्बन्धित कोइ स्पष्ट कानून ना होने के कारण इनको अमानवीय यातना सहनी पड़ती है , ऐसे में जरूरत है एक बेहतर कानून की जिसके माध्यम से शरणार्थियों को भी इंसान होने की सुविधाएं मिल सके ।

एक ऐसा कानून जिसमें स्पष्ट प्रावधान हो उनकी सुरक्षा , चिकित्सा एवं आइडेटिंफिकेशन की जिसके थ्रू जरूरत पड़ने पर उनकी मदद की जा सके साथ ही साथ उन्हें चिन्हित करके अपराध की राह पर बढ़ने से रोका जा सके…!!! एक शरणार्थी होना किसी दुखद त्रासदी से कम नही है पिछले दिनों जब सीरियाई समुद्र तट पर एक अबोध बालक आलियान कुर्दी का शव मिला समुद्र तट पर तो बरबस सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इंसान ने मजहब और जाति , राष्ट्र , समाज की जो दीनारें खड़ी की है उनका विभत्स चेहरा यही है क्या ?

चाहे जो मजहब हो वह बाते तो बहुत ऊंची करता है किंतु उन उच्च आदर्शो को आत्मसात करना बहुत कठिन है..!!! यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन नो जो दिशा दिखाई थी आज वह भी कुंद पड़ गई है , फीलिस्तीन के मुद्दे पर धर्म के आधार अमेरिका का इजराइल को समर्थन देन् और रूस का असद रीजिम को लाभ के लिए समर्थन करना इसने शिया और सुन्नी मिलिटेंटी में पूरे पश्चिम एशिया को विभाजित करके रखा है ।

भीषड नरसंहार को रोकने में यूएन पूरी तरह असफल रहा है । निश्चित तौर पर उग्र राष्ट्रवाद इस संस्था को कमजोर कर रहा है..!!! आज की एक और बड़ी खबर पाकिस्तान के उपर आर्थिक प्रतिबंधो का कड़ा किया जाना एक राष्ट्र के रूप में हमारी कूटनीति सफल रही है लेकिन पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहा पाकिस्तान इससे और अशांत होगा और फलस्वरूप सैन्यशासन को मजबूती मिलने के आसार संभव है जो अंंतत: हमारे लिए भी घातक है .. इस उपाय के बजाए आर्थिक कटौती को ना रोककर उसका प्रारूप बदल दिया जाता , इसको परिवर्तित कर दिया जाता अन्तरराष्ट्रीय स्कालरशिप एवं चिकित्सा सेवा के रूप में जिससे ज्यादा पाकिस्तानी युवा बाहर जाकर पढ़ते और डेमोक्रेटिक संस्थाओं से दो चार होते तो निश्चित ही स्थिति मे बदलाव की उम्मीद की जा सकती थी…!!!

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