पुस्तकालय का महत्व

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पुस्तक

हमारे जीवन में पुस्तक का बहुत महत्व होते है भले ही विधालय की बात करे या हमाए के रोज़ मर्रे के काम और किसी से वार्तालाब करने की बात हो अगर हम कोई भी पुस्तक पड़ते है और उसे सीखी हुई बातो को अपने निजी जीवन में उपयोग करे तो ये काफी असरदार साबित होती है जैसे की हम जानते है की अंग्रेजी |

भाषा सीखने के लिए बाजार में कई पुस्तके उपलब्ध है परन्तु अगर पड़ने के बाद अभ्यास ना किया जिया तो हम अंग्रेजी नहीं सीख सकते बदलाव तो इंसान में तब ही आएगा जब उसमे कुछ सीखने की जिज्ञासा होगी तो बात इतनी सी है की सीखना है तो मेरे अनुसार पुस्तकों से अच्छा मित्र आपका कोई भी नहीं हो सकता क्योकि यह हमारी तब भी साथ देगी जब हमारे पास कोई भी नहीं होता और टेंशन की कारण हमारा मस्तिष्क कुछ भी ना सोचने पे मजबूर हो जाता है फिर किताब उठाते है और न्यूरॉन्स यानी हमारे की काम करने की क्रिया शुरू हुई जो भी आपने पड़ा आपका ध्यान वह पलट गया |

ज़िन्दगी में कुछ सीखना है तो गुरु तो हमारे साथ होते ही है उसके बाद अगर कोई हमे सच्चाई से सिखाता है तो वो है हमारी पुस्तके और पुस्तकालय में हर तरह की पुस्तके मिलती है भले ही कॉमेडी ,साहित्य ,कला या फिर आपके कोई विषय हो पस्तकालये यानी ज्ञान का समुन्द्र और इसमें डुबकी लगा के हमें तैरना आना चाहिए यानी पद के चीज़ो को समझना उनपे विचार विमर्श करना . ज्ञान ऐसी कुंजी है जो हमसे कोई नहीं छीन सकता |

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