पुण्य प्रसून बाजपाई जी सुनिए !

0
71
views

पुण्य प्रसून बाजपाई जी का कहना है कि उनको मोदी जी का नाम लेने से रोका गया। बात इतनी सी है कि दिल्ली के मंत्रियों ने एक महिला को झूठा बयान देने के लिए राजी करवा लिया जिससे मोदीजी को लगे कि उनकी जनता खुश है। मोदीजी तो NRI हो गए हैं उनको झूठ सही कुछ भी बतादो उसका वो विदेश तक मे प्रचार कर आएंगे। बाजपाई जी ने उन मंत्रियों से सवाल करने के बजाए प्रधानसेवक जी का नाम लेने में विश्वास रखा लेकिन इस बात पे चैनल ने ये बोल दिया कि आप सिर्फ मंत्रियों तक ही सवाल करें मोदीजी को न घसीटें लेकिन इसपे बाजपाई जी का तर्क ये था कि जब सारी योजनाएं मोदीजी के नाम पे होती हैं तो उनका नाम क्यों न लिया जाए?

बात में दम है! मुझे लगा क्यों न सर की सारी कवरेज देख जाऊं यूट्यूब पे। वो मेरे गाँव में कहावत है की “दशा दस दिन, चलान चालीस दिन और स्वभाव ज़िन्दगी भर” तो मुझे लगा कि पहले भी ऐसा किया होगा उन्होंने। लेकिन जब मैं 2014 के पीछे गया तो मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। सोनिया जी के नाम पे बानी कई योजनाएं फेल हो रही थीं लेकिन सोनिया जी का नाम ही नही था बाजपाई जी की रिपोर्ट में, रूस और भारत की संवेदनशील डील साइनिंग में भी सोनिया जी मौजूद थीं लेकिन इन्होंने ये सवाल भी नहीं पूछा कि सोनिया जी की हैसियत क्या है वहाँ बैठने की?

वादा कौन निभाता है ?

सोचने वाली बात ये है कि उनका स्वभाव था क्या? तीखे सवाल पूछना या सिर्फ किसी एक दल से तीखे सवाल पूछना? मैं ये नहीं कहता कि बाजपाई जी ने सही जगहों पे सवाल नहीं किये लेकिन वो कई गलत जगहों वे चुप रह गए। ख़ैर मेरा ये मानना है कि बाजपाई जी के सवाल ज़रूरी थे लेकिन उनकी पुरानी शैली मुझे थोड़ी खटक रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.