परसाई जी का व्यंग : राम भरोसे का इलाज

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राम भरोसे

राम भरोसे का इलाज परसाई जी द्वारा लिखित पुस्तक “निठल्ले की डायरी” जो समाज में हो रहे क्रिया-कलापों पर सीधा और सटीक व्यंग करती है। इस अध्याय में उन्होंने देश की शासन व्यवस्था पर तीखा व्यंग करते हुए कहा है कि शासन में कृपा करने का नियम नहीं है पर सजा देने की छूट अवश्य है। वहीं घूस लेने वाला सदा आपको शांति की अवस्था में मिलेगा क्योंकि चिल्लाता तो हमेशा रोटी खाने वाला है।

उस रोटी मिल जाए यही उसके लिए सौभाग्य की बात है। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए फिर से खून पसीना एक करना पड़ता है तो जाहिर सी बात अपने अधिकारों को पाने के लिए उसे गिड़गिड़ाना पड़ेगा, सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे क्योंकि उसने रोटी खाई है ना खून नहीं पिया है।

अस्पतालों की रूपरेखा जिसमें मरीज को भर्ती कराने के लिए एक फॉर्म भरना अत्यंत आवश्यक है। जिसमें जरूरी बातों से ज्यादा समय व्यतीत करने वाली जानकारियां पूछी जाती हैं। मरीज जिंदा बचेगा या नहीं यह उनके लिए दूसरा विषय है। इतना ही नहीं डॉक्टरों की सुविधा भी श्रेणियों में बैठी होती है यदि गरीब है तो उसे भर्ती कराना उतना महत्वपूर्ण नहीं है।

वह मर भी जाता है तो किसी का क्या जाएगा उसके जीवन का मोल कहां है। वहीं दूसरी ओर पैसे वाले व्यक्ति को भी हो गई तो लगता है डॉक्टरों की टीम की शामत आ जाएगी। यदि सबकी खैर चाहिए तो उसका जल्दी से जल्दी ठीक होना बहुत जरूरी है।

डॉक्टरों की श्रेणियां कैसे बड़ी होती हैं जैसे किसी गरीब के ऑपरेशन के लिए उस डॉक्टर को बोल दिया जाएगा जो अभी इस क्षेत्र में नया है ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो या नहीं यह उनकी जिम्मेदारी में कहां। अरे भाई साहब उस पैसे वाले पर भी यह फॉर्मूला कभी आजमा कर तो देखो! लगता नहीं है कभी कर पाओगे? क्योंकि खून तो हमेशा उस गरीब का चूसा है जिसके पास पहले से ही उसकी कमी है।

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