पत्थरबाजी करने वालों पे माफीनामा कम और कार्रवाई ज्यादा हो

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देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, ‘कश्मीर’, बल्कि बना क्या है, शुरू से ही वैसा ही है| सत्ता में आते हैं ये बोल कर के कि 370 हटा देंगे और 377 हटा देते हैं| जिनके वजह से हम अपने घरो में चैन की नींद सोते हैं| असल में उनकी जिंदगी बड़ी मुश्किल है कश्मीर में| वो उन्हीं की रक्षा करते है और वही लोग इन्हीं सैनिको के ऊपर पत्थरबाजी करते हैं और देश में बैठ के अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे है|  कुछ नेता बोलते है कि वो भटके हुए नौवजवान है| अरे भाई ! मै कहता हूँ कि कैसे भटके हुए नौवजवान? आर्मी अगर अपने बचाव में गाड़ी चढ़ा देती है तो आर्मी के ऊपर अनेकों धाराएँ लगाकर केस दर्ज कर दिया जाता है| वहीं अगर उन गद्दारों को पकड़ा जाता है तो माफ़ी देकर उन्हें जेल से बाहर कर दिया जाता है| अगर आतंकवादी मारा जाता है तो जनाजों में हज़ारो की तादाद में भीड़ आके बताती है कि वो हिंदुस्तान से बिलकुल प्यार नहीं करती है, मै कहता हूं, इस प्रकार के लोगों को गोली मार देना चाहिए|

ईमानदारी में भी भाजपा कांग्रेस से बहुत आगे

कश्मीर घाटी में मुठ्ठी भर लोग आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं| ऐसे लोगों को चिन्हित किया जाना चाहिए और कार्रवाई की जगह सीधे गोली मार देना चाहिए क्योंकि जिसको देश से प्यार नहीं वो जीने का हक़दार नहीं|

सरकार को यह भी करना चाहिए कि यदि यह लोग आतंकियों का ही साथ देने पर आमादा है तो फिर उनके साथ भी आतंकियों जैसा ही व्यवहार करना चाहिए| जो लोग हिंदुस्तान में रह कर भी हिंदुस्तानी नहीं बन पा रहे है, उनके साथ नरमी बरते जाने का कोई मतलब नहीं है|

ऐसे लोग देश के प्रति वफादार नहीं है, उनके प्रति हर वह सख्ती होनी चाहिए जो एक गद्दार के साथ होती है| जिन सैनिकों पर पत्थर बरस रहे हैं, वह देश के जाबाज़ सपूत है। हाथ में हथियार होने के बावजूद हमारे सैनिक पत्थर की मार खा कर जान देना कबूल कर रहे हैं लेकिन आदेश के इंतजार में अपने हथियार इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं| सरकार को चाहिए कि उनके आंतकवाद के सूत्र इन इस्लामी आतंकवादियों पर नकेल कसने के लिए सेना को स्वंतंत्र कर कर देना चाहिए|

 

 

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