तेल के दामों पर चुनावी राजनीति

0
166
views

भारत उन देशों में से है जो बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करते हैं और उसके लिए डॉलर का भुगतान करते है़ं | पिछले एक वर्ष में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है| जिसके कारण हमारे आयात पर इसका काफी असर पड़ा है| कच्चे तेल की कीमतें जहाँ 30 डॉलर % बैरल से भी कम थी|वह बढ़कर $80 तक जा पहुंची है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आए दिन बढ़ोतरी देखने को मिल रही है भारत की प्रशासनिक राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹80 के पार हो चुकी है तो वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में इसकी कीमत ₹90 तक पहुंच गई है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफे का असर पूरे देश में है। वहीं दूसरी और पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा के चलते विपक्ष को BJP का घिराव करने का एक बेहतर मौका मिल गया है। इसी इसी क्रम में कदम बढ़ाते हुए कांग्रेस ने 10 सितंबर को 21 जिलों के समर्थन के साथ भारत बंद का आह्वान किया था। कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता जमा करने आरोप लगाते हुए कहा कि कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें कम होने के बावजूद भारत सरकार ने एक्सरसाइज ड्यूटी बढ़ाई है।

महंगाई में बढ़ोतरी निश्चित तौर पर जनता में असंतोष का भाव पैदा कर रही है और सभी के अच्छे दिन आने का इंतजार नकारात्मकता की और बढ़ता जा रहा है।बीजेपी ने अभी हाल ही में कार्यकारिणी बैठक बुलाई ,लोकसभा की चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए क्योंकि कहीं ना कहीं अभी हाल ही में हुए एससी एसटी एक्ट में संशोधन, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने के कारण सवर्णों में इनके प्रति नाराजगी है।पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी जैसा करना चुनाव रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है ताकि चुनाव के ठीक पहले ऐसी स्थिति से ना गुजरना पड़े।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.