कोई ख़ुशबू पास रहती है

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कोई ख़ुशबू पास रहती है,

जब भी वो सामने होती है।

वक़्त मानो थम-सा गया हो,

जब भी वो मुस्कुराती है।।

कोई ख़ुशबू पास रहती है,

जब भी वो कोई गीत गुनगुनाती है।

गुल मानो खिल-सा गया हो,

जब भी वो इतराती है।।

कोई ख़ुशबू पास रहती है,

जब भी वो याद आती है।

ख़ार मानो चुभ-सा गया हो,

जब भी वो दूर होती है।।

कोई ख़ुशबू पास रहती है,

जब भी वो सपनों में आती है।

शमां मानो बुझ-सा गया हो,

जब भी वो बेज़ार होती है।।

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