कायरों की तरह नहीं जीना है !

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  • रमेश चंद्र शुक्ल 

कायरों की तरह नहीं जीना है ! एक जिंदगी मिली है …एक ही सपना होना चाहिए ! चाहे जो बनो लेकिन लड़ो उस सपने के लिए वो चाहे आइएएस हो जज हो या कुछ और ! जो चीज तुम्हें कमजोर करे , वार करे तुम्हारे अंन्तर्मन पर , तुम्हारे अस्तित्व पर उंगली उठाये वो सत्य नहीं है , वह विष है तक्षण त्याग करो उसका .. वो तुम्हें हमेशा कमजोर करेगा और दुनिया तुमसे कोशों दूर होगी ! याद करो उस सपनें को जो तुमने देखा था छोड़ ते हुए अपना परिवार , अपना घर , अपना परिवेश कौन था साथ ..सिर्फ़ तुम… और तुम्हारी अंत न होनी वाली लड़ाई …! ऊर्जा को केन्द्रित करना आसान नहीं है ! अगर ऊर्जा का प्रवाह अत्यधिक है तो तुम्हारा बहना तय है .. वो भटकाएगी लेकिन एक क्षण भी केंद्रित हुई तो तुम्हारे सामने कोइ टिक नहीं सकता … याद रखो ”योग : कर्मसु कौशलम् ” यह मूल मंत्र है संघ लोक सेवा आयोग का ! जीवन में त्याग , तपस्या और संयम जरूरी है !

यह दिब्य शक्तियां उस समय काम आती हैं जब तुम कमजोर पड़ रहे हो .. अचानक इतनी ऊर्जा मिलेगी कि तुम उसे जिस भी काम में लगाओगे वहां सिर्फ़ तुम दिखेगो .. हर महफिल , हर परीक्षा में तुम्हारा अपमान , तिरस्कार करने वाले ..वहीं मुर्दे की तरह निर्जीव नजर आएंगे .. जला दो खुद को जिससे आने वाले भारत को आपसे वह प्रकाश मिले की उसकी चमक फिर से हमें विश्व गुरू बनाये !! एक ही सत्य है , ऊर्जा को न उत्पन्न किया जा सकता है ना ही नष्ट इसे केवल केंद्रित किया जा सकता है ! विज्ञान में एक प्रयोग देखा था दर्पण सूर्य की सामान्य किरणों को एक जगह प्रक्षेपित करता है और उससे जो ऊर्जा निकलती है ..भस्म कर देती है तृण मूल को ! याद रखो जब कमजोर पड़ोगे सारे रंग साथ छोड़ देगें जो साथ है आलोचना शुरू करेगें , इसलिए .. रूकना ..नहीं …झुकना नहीं… तेरा ..अस्तित्व ही तेरी ..पहचान है

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