कांग्रेस और महाभियोग

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  • रमेश चंद्र शुक्ल

कांग्रेस महाभियोग लाने जा रही जस्टिस दीपक मिश्र पर कांग्रेश को महाभियोग के आधार पता हैं  (1)साबित कदाचार और(2) शारीरिक , मानसिक अक्षमता  !! तो कौन सा कदाचार किया इस ब्यक्ति ने ?? सिर्फ यही ना कि एससी एसटी एक्ट का ”प्री पनिशमेंट क्लाज” जो पूरी तरह अार्बिट्रेरी था न्यायिक प्रक्रिया पर उस पर विचार करने का निर्देश दिया जिससे कि किसी निर्दोष ब्यक्ति को सजा ना मिले (2) उसमें भी जांच के बाद कार्यवाही करने का सुझाव है क्योंकि महिला उत्पीडन अधिनियम की तरह इसका भी दुरूपयोग किया जा रहा था . ब्यक्तिगत दुश्मनी का माध्यम बन गया था यह क्लाज बगैर जांच के सीधे जेल भेजने का प्रावधान करता था . बस आपको एक एफआई आर लाज करवानी थी और कोइ कारण ? दूसरा जस्टिस चेलमेश्वर और गोगोइ की अध्यक्षता वाली कांफ्रेश मास्टर आफ रोस्टर को लेकर तो ऐसा तो है नहीं कि यह पहली बार हो रहा है  यह हो रहा था लगातार 2008 में जब जस्टिस बालाकृषणन सीजेआई थे उन्होने पदोन्नति में रिजर्वेशन लागू करवाया . उस समय भी कई जज थे बाहर आकर कांफ्रेश नहीं किए  लेकिन अबकी बार ऐसा क्या हुआ कि नियम को ताकपर रखकर अंदरूनी कलह बाहर आ गई ? खैर इस पर भी बिशेषज्ञों की दो तरफा राय है कि सही क्या है और गलत क्या है दोनों तरफ के तर्क दमदार हैं !

फिलहाल तो कांग्रेस पार्टी अपनी मूर्खतापूर्ण हरकत के कारण लगातार मटियामेट हो रही है हर बुद्धिमान आदमी जो जाति और धर्म के चोले में कसा नहीं है उसे पता है जस्टिस दीपक मिश्र जैसा न्यायाधीश देश को मिलना बहुत मुश्किल है आतंकियों , आतताइयों को बेरहमी के साथ उनके कब्र में पहुंचाने वाले दीपक मिश्र को कोइ भूल नहीं सकता जब दूध पीती बच्चियों के साथ हैवानियत हो ,देश पर आतंकी साजिश हो या ”प्री जस्टिस” बिना सुनवाई के बेगुनाहों को सजा मिले तो न्याय का मंदिर हमेशा .. दीपक मिश्र जैसे मजबूत और सुलझे ब्यक्ति के हाथ में होना चाहिए  जो बिना दबे , बिना डरे , बिना राजनीतिक दबाव के .. शैतानों के कब्र और फंदे की ब्यवस्था करके बैठे !! कुछ विवादित मुद्दे हैं जैसे मास्टर आफ रोस्टर , भ्रष्टाचार एवं अपारदर्शिता

जिन्हें दूर करना राजनीतिक कार्य है है ना कि ज्यूडीशियरी का संसद में बिल लाकर इसमे पारदर्शिता लाई जाए ना कि राजनीतिक मतलब के लिए जुडीशियरी का इस्तेमाल करना क्या कांग्रेस को नहीं पता क्या कि न्यायिक नियुक्ति बिल और कमीशन को खारिज करने में सभी जज साथ थे वह भी जो बाहर आज कांफ्रेश कर रहे थे ..तब कहां गया था उनका जमीर तब तो मलाई मारने में साझेदार थे आज जब मन मुताबिक काम नहीं हुआ तो विरोध शुरू हो गया !! या कहीं जाति के नाम पर तो नहीं टीस हो रही है ? खैर ऐसा नहीं होना चाहिए .. सेक्यूलर लोग जाति नहीं देखते लेकिन अब एक ब्यक्ति को पूरी ताकत से रोका जा रहा है , दुष्प्रचार का माहौल बनाया जा रहा है #क्षमा किसी को बुरा लगा तो लेकिन आपका आधार विरोध का तर्कहीन है |  हैरानी है इस अनपढ़ पढ़ी लिखी मानसिकता पर !

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