कमज़ोर नहीं आज़ाद हो तुम

0
238
views
आज़ाद
बस जरुरत है एक कदम बढ़ाने की,
भीड़ में अपनी पहचान बनाने की,
डर डर के जीने से कुछ हासिल न कर पाओगी
खुद के लिए आवाज़ उठाओगी तो हक़ से जीना सीख जाओगी।
माँ बाप का तो फ़र्ज़ था तुम्हे चलना सीखना
अपना सफर तय करना तो तुम्हारे हक़ में है,
ढलती शाम में घर से निकलने का डर खो देने होगा अब
क्योंकि अपनी मंज़िल को पाने के लिए तुम्ह खुद लड़ना होगा,
ज़माना तुम्हारे लिए नहीं लड़ेगा तुम्हे तुम्हारी आवाज़ खुद बनना होगा अब।
ये सोच के बैठ जाना की लड़की हूँ मैं,
तो गलत है ये….
तुम्हे लड़की शब्द को बेबस नहीं देश का गौरव बनाना होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.