कन्या का पूजन कैसे हो,
जब सबरीमाला में प्रवेश का बंधन हो।
नौ दिन तक तो अंजन हो,
बाकी दिन महज़ वो मनोरंजन हो।।
कन्या का पूजन कैसे हो,
जब मासिक धर्म में प्रवेश का बंधन हो।
नौ दिन तक तो चन्दन हो,
बाकी दिन महज़ चुम्बन हो।।
कन्या का पूजन कैसे हो,
जब नवरात्रि में ही बस उसका वंदन हो।
नौ दिन तक तो उसका पूजन हो,
बाकी दिन महज़ वो कंकन हो।।
कन्या का पूजन कैसे हो,
जब क़ायनात में बस उसका शोषन हो।
नौ दिन तक तो धड़कन हो,
बाकी दिन महज़ वो चीरहरन हो।।

2 thoughts on “कन्या का पूजन कैसे हो?”

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