इसी शहर में…..

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शहर
  • डॉ.कैलाश मिश्र जी 

इसी शहर में मैं रहता हूँ
इसी शहर में तुम रहती हो

हालचाल तक नहीं पूछती
इतनीं क्यों गुमसुम रहती हो 

पास नहीं होता जब कौई
दूर दूर तक तुम रहती हो

फोन उठानें में भी आफ़त
ऐसा क्या करती रहती हो

जीवन के बदरंग भाल पर
बनकर तुम कुमकुम रहती हो || 

 

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