आतंकवाद हमारे समाज में

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आज के योग में व्यक्ति और समाज को भय तोड़ कर रख देता है अगर बात आकर समाज में ऐसे भय की जिसके हम देश वासियो को भयभीत होना पड़ता है जी हआ बात हो रही है आतंकवाद की जिसके कारण पूरा देश की आपदा की बहुत बड़ी वजह है . बात करे आतंकवाद की तो हम 2611 का वो दिन कैसे भूल सकते है जिसमे हज़ारो बेगुनाह को मारा जाता है बिना किसी गलती के इतनी बड़ा दंड देना कहा का इन्साफ है और किसी एक धर्म के नाम पे लोगो को भयभीत करना ताकि वो इंसान की पहचान धर्म जानकार ही  करे ना की उसकी विशेषताएं .और भी बहुत से ऐसे हादसे जिन्हे भूलाया नहीं जा सकता जैसे राजीव गाँधी का अस्ससिनाशन ,मेक्का मस्जिद में बम ब्लास्ट हर जगह इन आतंकियो ने लोगो को दुनिया से मिटाने का नाम किया है.

आतंक से अँधेरा फैलता है और इस अँधेरे में हम सभी को इसका सामना  करना  पड़ता  है ना ही इसपे  रोक लगी है और नाही कोई इसपे  काबू पा सका है क्यूकी आतंकवाद तो जड़ तक समां चूका है . हमारे कई पडोसी देश आतंकवाद को बढ़ावा देते है ताकि हम पर वो अपनी रणनीतियों से काबू पाए और है हमारे देश को कमज़ोर बनाने का लक्ष्य ले कर आतंकी हमले किये जाते है इसके कारण भारत ही नहीं पूरे संसार को मुश्किलों का सामना सदैव करना पड़ता है आज फिर आतंक दहाड़ रहा है कोई है जो उसको संभाल सके. इस बड़ी समस्या को कौन नियंत्रण में ला पायेगा .

आतंकवाद व्यक्तिवाद और समाजवाद के खिलाफ है वो तो मानवता का भी कटर दुश्मन है उसकी चपेट में हर जाती के लोग जाते है स्व्तंत्रता के कारण ही इन आतंकवादियों को आज़ादी मिल जाती है ताकि वो अपने गुनाह को अंजाम दे सके इस आतंकवाद से पूरे समाज में भय नामक बादल छा गए है जिसे व्यक्ति आज़ादी और बेफिक्र हो कर घुम भी नहीं सकता .यदि इस  वातावरण से मुक्त होने की आकांक्षा है तो जनता को निर्भीक होकर आगे आना होगा और समस्त समाजविरोधी शक्तियों का सिर कुचलना होगा अगर हिंसा का उत्तर हिंसा से दिया जाए तो आवशयक नहीं हमेशा हम ही विजयी हो .हमे एक जुट हो कर आतंक के खिलाफ लड़ना होगा क्युकी अगर हम इकठे हो जाते है तो कोई भी मुसीबत हमें हरा नहीं सकती .भय किससे और क्यों एक दिन तो सबको काल का शिकार बनना है तो भय किस बात का.

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