अल्पसंख्यक

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  • अंकित तिवारी

अल्पसंख्यक का मतलब एक ऐसा वर्ग जिसकी जनसंख्या और वर्ग से कम हों उनको अल्पसंख्यक कहते है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने 2014 में परषी को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया। देश में रोज कई कानून का बदलाव होता है, क्योकि लोगो के मूल  अधिकार हनन हो , सब लोगो को न्याय मिले और सब का  सामान अधिकार हो लेकिन कुछ ऐसी व्यवस्था आज भी यह दर्शाता है की सब को सामान अधिकार नहीं है

जैसे 1993 में केंद्र सरकार द्वारा जरी किया गया नोटिफिकेशन ईसाई, मुस्लिम , सिख, बौद्ध,  को सामिल किया गया हैं । जबकि ऐसे बहुत से जगह है जहा पे हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। वहाँ पे तो केंद्र सरकार द्वारा ही  राज्य सरकार द्वारा हिन्दू को अल्पसंख्यक घोषित किया गया है। 1992 में अल्पसंख्यक अधिनयम आयोग बना जिस कानून के अन्तर्गत केंद्र सरकार यह तय करती गई कौन हैं और कौन नही अल्पसंख्यक है।

जबकि जम्मू  और कश्मीर में  मुस्लिम बहुसंख्यक है वहाँ पे हिन्दू आबादी मात्र 2.5 फीसिदी हैं।  फिर भी वहाँ पे हिन्दू अल्पसंख्यक का दर्जा नही प्राप्त , ना हि उनको कोई विशेष दर्जा प्राप्त हैं। हर दिन उनपे हमले होते हैं ना ही कोई बिशेष सुरकक्षा का प्रावधान भी नही है, जैसे अल्पसंख्यक को प्राप्त है।

ऐसे मिजोरम में ईसाई की जनसँख्या 96.9 प्रतिशत हैं, लेकिन यहाँ भी हिन्दू जो 2.7 को बहुसंख्यक माना जाता हैं और उनको अलपसंख्यक को मिलाने वाली  सुविधाये भी नहीं मिलाती हैं। जैसे सरकार तकनीकी पढाई के लिए बच्चों के लिए ₹20000 की आर्थिक सहायता। किसी भी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा पोषित निधि शिक्षा संस्थान में प्रवेश पाने के लिए कुछ विशेष छूट प्रदान किया जाता।

बहुसंख्यक होते हुए भी अल्पसंख्यक का लाभ ले रहे हैं।  क्या सरकार को पुनः एक बार अल्पसंख्यक अधिनयम पे बिचार नहीं करना चाहिए। सब को सामान अधिकार है अनुच्छेद14 के अनुसार तो यहा पे भेद -भाव क्यो?

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