अलंकार

0
303
views
अलंकार
  • उज्ज्वल श्रीवास्तव 

 

जब मै कविता लिखूं तब तुम अलंकार बन जाना,

अर्थहीन शब्दों को भी तुम अर्थनिहित बना देना,

जब मै थककर कलम नीचें रख दूँ, तब तुम उसे थमा देना,

समाप्त हो रहे मेरे विचारों में तुम अपने ख्याल मिला देना,

खत्म हो जाएं अलंकार अगर, तुम नए अलंकार बना देना,

कम पड़ जाएँ शब्द अगर तुम नया शब्दकोष बना देना,

मेरे साथ मिलकर इसे तुम वधू की तरह सजा देना,

प्रेमरस घोलकर इसमें अंत में पूर्णविराम लगा देना,

मेरी इस रचना को तुम फिर से अमर बना देना।

 

रेत के तले दबी लाशें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.